सफलता की मिशाल आठवी पास हाईटेक किसान गजानन पटेल

 

महासमंुद जिले के छपोरा गांव के युवा किसान गजानंन पटेल आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मिशाल है जो खेती किसानी को कम आॅकते है। खेती की अनिश्चितताओं से परेशान होकर आज जहाॅ बड़ी संख्या मे आज लोग इसे छोड़ रहे है वहीं गजानन पटेल ने इसे चैलेंज के तौर पर लिया और वो कर दिखाया की आज एग्री कल्चर साइंटिस भी इनसे ट्रेनिंग लेने आते है। गजानन महज आठवी पास है। लेकिन अपने हाईटेक खेती की बदौलत मात्र चार एकड़ जमीन से 40 लाख रूपए से ज्यादा की सालाना आमदनी कर रहे है। उनके इस मेहनत के लिए पिछले साल राज्य स्थापना दिवस पर राज्य शासन की ओर से उन्हें उन्नतशील पुरस्कार का अवार्ड और 1 लाख रूपए के पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था।

गजानन पटेल के पास महज 4 एकड़ की खेती की जमीन है। पहले इन्हे धान की फसल से अस्सी हजार रूपए का ही मुनाफा होता था। परन्तु अब फल और सब्जी की खेती से भी उन्हे इतनी ही जमीन पर अब चालीस लाख का सालाना इनकम होता है। गजानन पटेल पालीहाउस खेती करने वाले प्रदेश के पहले किसान है। इस तरह की खेती में मौसम की मार का असर नहीं होता है। खेती वाली जमीन को घर के जैसे आकार में पारदर्शी पाॅलीमर से ढ़क दिया जाता है। उसे पाॅलीहाउस कहते है। पाॅलीहाउस के अन्दर न बाहर की हवा जा सकती है और न ही पानी इस कारण किडे़-मकोड़े का असर नहीं होता है। टेंपरेचर भी जरूरत के मुताबिक कम ज्यादा किया जा सकता है। इस तरह मौसम पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाती है। किटनाशक, खाद्य, सिचाई ये सभी काम पाॅलीहाउस के अंदर ही होते है। सब कुछ नपातुला मिलने के कारण ये भी तय हो जाता है कि किस तारीख को कितनी फसल मिलेगी। गजानन पटेल की सफलता की कहानी से प्रेरित होकर देशभर से किसान उनके पास ट्रेनिग के लिए आते है। गजानन का मानना है कि खेती के लिए व्यावसायिक दृष्टिकोण होना जरूरी है सिर्फ धैर्य या उत्साह से काम नहीं होगा और नई तकनीकों के इस्तेमाल से ही किसान उन्नतशील होगा।